Open Access Open Access  Restricted Access Subscription Access

‘‘सामाजिक-व्यवस्था और शिक्षा पर निध्रनता का प्रभाव : एक दृष्टिकोण

. .

Abstract


साकाजिक संगठन वह व्यवस्था है जिसके द्वारा समजा के विभिन्न अंग परस्पर और सम्पूर्ण समजा से एक अर्थपूर्ण तीरके से संबंधित रहते हैं। समाज काई अखण्ड व्यवस्था नहीं है यह अनेक निर्मायक इकाइयों से मिल कर बना है। जब ये सभी इकाइयां नियमित एवं क्रमबद्ध होकर एक निश्चित प्रतिमान प्रस्तुत करती है, तो समाज में संगठन या एक व्यवस्था पनपती है। समाज की निर्मायक इकाइयों में परिवार, विभिन्न प्रकार के सूह, ग्राम, नगर, विवाह संस्था, आर्थिक एवं सामाजिक संस्थायें आदि आते हैं। इन सबके सुसम्बद्ध रीति से जुडे़ होने पर अपने-अपने नियम कार्यो के करते रहने से ही समजा की व्यवस्था बनी रहती हैं व्यवस्था के अभाव में कोई भी समाज ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर सकता, अपने इच्छित लक्ष्यों की पूर्ति में सफल नहीं हो सकता। मानव समाज का अस्तित्व ही उसकी सामाजिक व्यवस्था पर निर्भर है।

Keywords


.

Full Text:

PDF


DOI: https://doi.org/10.21922/srjhsel.v6i26.11575